दिल्ली पुलिस SHO की कुर्सी पर बैठकर, फिर विवादों में घिरी राधे माँ

दिल्ली पुलिस SHO की कुर्सी पर बैठकर, फिर विवादों में घिरी राधे माँ

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नई दिल्ली।फिर विवादों में घिरी राधे माँ एक दिल्ली पुलिस के SHO की कुर्सी पर बैठी है और सब चैनल पर वो विडिओ दिखाया जा रहा हैं।कांग्रेस ने हमला करते हुए कहा कि, दुर्भाग्य से दिल्ली पुलिस जो भारत की भाजपा सरकार के अधीन है, अब अपनी ज़िम्मेदारी और जवाबदेही छोड़ कर,अब वो दूसरे प्रपंच्चों में लग गई है।

पुलिस को ये चाहिए कि वो चाहे नारी सुरक्षा का मामला हो, चाहे जन सुरक्षा का मामला हो, अपना कर्तव्य निभाएँ। बजाए, वो पुलिस स्टेशन को प्रपंच्चों का अड्डा बना लें। हमें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने टेलिविजन चैनल पर चल रहे इस तमाशे को अवश्य देखा होगा और वो इस पर कड़ी कार्यवाही करेंग

कौन हैं राधे माँ-

दरासल, राधे मां का पूरा नाम सुखविंदर कौर है और वह पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली हैं। हालांकि बाद में वह मुंबई चली गई और बोरिवली से अपना आश्रम चलाने लगी।

48 वर्षीय राधे मां का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले में हुआ था। उनका वास्तविक नाम सुखविंदर कौर है और वह 9वीं कक्षा तक पढ़ी हैं। राधे मां की शादी 18 साल की उम्र में मुकेरिया के मनमोहन सिंह से हुई थी। शादी के बाद राधे मां के पति कतर में नौकरी करने के लिए चला गया था। इस दौरान राधे मां एवं उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। यहां तक कि राधे मां की माली हालत इतनी खराब थी कि उसने लोगों के कपड़े सिलकर अपनी रोजी रोटी कमानी शुरू की। 21 साल की उम्र में सुखविंदर को उस समय नया जीवन मिला जब वह महंत रामाधीन परमहंस के शरण में जा पहुंचीं। परमहंस ने सुखविंदर को 6 महीने तक दीक्षा दी। आध्यात्म की दीक्षा ग्रहण करने के बाद परमहंस ने सुखविंदर को एक नया नाम दिया और उसके बाद से सुखविंदर राधे मां के नाम से जानी जाने लगी। राधे मां पर आरोप लगते रहे है कि वो सिर्फ आशीर्वाद देने में ही नहीं, बल्कि तंत्र मंत्र में भी निपुण