क्यों हैं अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी के ही विधायकों और अफसरों से परेशान

क्यों हैं अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी के ही विधायकों और अफसरों से परेशान

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नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी ही पार्टी के विधायकों से परेशान हैं क्योंकि उनके कहने के बावजूद वे जनता से नहीं मिल रहे हैं।  इससे पार्टी की छवि लगातार खराब हो रही है और पार्टी से जनता की दुरी बढ़ रही है। हाल के निगम चुनाव मैं आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन इसी लिए ख़राब रहा। जनता ने हमें वोट ही नहीं हमें विश्वास दे कर सत्ता मैं भेजा है ताकि हम आम आदमी की सेवा कर सकें।

 

 

विधायकों को लिखी चिट्ठी

केजरीवाल ने अपने सभी विधायकों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि “पिछली विधायक दल मीटिंग में हमने तय किया था कि सभी विधायक रोज सुबह जनता से मिलने के लिए अपने दफ्तर में उपलब्ध रहेंगे. ‘कुछ’ विधायकों को छोड़ सभी ने इसका पालन करना शुरू कर दिया है. मैं उम्मीद करता हूं बाकी विधायक भी इसे जल्द लागू करेंगे.”

 

खामियाजा पार्टी उठा रही है

यही नहीं केजरीवाल ने आगे लिखा है कि “कुछ क्षेत्रों के लोगों की शिकायत है कि उनके विधायक उनसे कभी मिलने नहीं आए. पार्टी की सरकार के काम की चारों तरफ सराहना है लेकिन जनता उस विधायक से भी मिलना चाहती हैं जिसे उसने वोट देकर जिताया है.” केजरीवाल की इस बात से पता चलता है कि पार्टी के विधायक और जनता में दूरी है जिसका खामियाजा पार्टी उठा रही है और विधायक कहने के बाद में जनता से नही जुड़ पा रहे हैं. यही कारण है कि केजरीवाल ने अपने विधायकों से प्लान मांगा है और कहा है कि विधायक विधानसभा क्षेत्र में किस इलाके में किस दिन जाएगा इसका पूरा ब्यौरा दें।

 

दफ्तर के बहार लगा दिया बोर्ड

केजरीवाल ने मुख्य सचिव एमएम कुट्टी को बाकायदा अफसरों के दफ्तर के बाहर बोर्ड लगाकर यह बताने को कहा है कि यह अफसर रोज सुबह 10-11 बजे बिना अपॉइंटमेंट जनता से मिलेगा और नहीं मिलने पर इस नंबर पर शिकायत करें. इस नंबर पर आने वाली शिकायतों की जानकारी मुझे दी जाए और मुख्य सचिव इन शिकायतों पर कार्रवाई करें.

 

दरअसल आम आदमी पार्टी ने दिल्ली नगर निगम चुनाव के बाद यह पाया कि आम जनता से उसकी दूरी बढ़ने के चलते उसका जनाधार घट गया.  इसलिए केजरीवाल ने अपने सभी मंत्रियों, विधायकों, अफसरों को रोज सुबह आम जनता से बिना अपॉइंटमेंट मिलकर उनकी समस्या का समाधान करने का आदेश दिया. लेकिन इस योजना को लागू करने या यूं कहें इसकी हवा निकालने में खुद विधायक और अफसर लगे हुए हैं.