कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का बड़ा बयान, सोनिया गांधी जाएगी गुजरात पार्टी का प्रचार करने

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का बड़ा बयान, सोनिया गांधी जाएगी गुजरात पार्टी का प्रचार करने

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रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की एक महत्वपूर्ण बैठक थोड़ी देर पहले सम्पन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्षा, श्रीमती सोनिया गाँधी जी ने की। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह , कांग्रेस उपाध्यक्ष  राहुल गाँधी, संसद में विपक्ष के नेता और लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता व पार्टी के कांग्रेस कार्यममिति के सदस्यों ने इस बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में सबसे पहले कांग्रेस कार्यसमिति के पूर्व सदस्य,.एल.फोतेदार जी को श्रद्धांजलि दी गई।

कांग्रेस अध्यक्षा  सोनिया गाँधी ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए अपने Opening remarks में 6 महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने जहाँ कांग्रेस पार्टी के इलेक्शन कमेटी के चेयरपर्सन मुल्लापल्ली रामचंद्रन और इलेक्शन अथोर्टी के सभी सदस्यों का स्वयं और कांग्रेस कार्यसमिति की तरफ से कांग्रेस पार्टी का चुनाव संपन्न कराए जाने पर बहुत-बहुत धन्यवाद दिया। सोनिया गाँधी ने विशेष तौर से ये भी उल्लेख किया कि अब कांग्रेस पार्टी इन संगठनात्मक चुनाव के बाद शायद देश और दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के तौर पर उभरी है। कांग्रेस की विविधता की पहचान केवल इस बात से की जा सकती है कि इस देश के हर ब्लौक, हर गाँव और हर जिले के अंदर कांग्रेस पार्टी का यूनिट और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद हैं। कांग्रेस कार्यसमिति और कांग्रेस अध्यक्षा ने उन करोड़ों-करोडों कांग्रेसजनों का जो विषम से विषम परिस्थियों में छोटे-छोटे कस्बों, गाँवो, जिलों, तहसीलों और पूरे देश और प्रांतों में कांग्रेस का झंड़ा विषम परिस्थितियों में बुलंद रखते हैं, उनका धन्यवाद भी किया।

आज के मौजूदा हालात की चर्चा करते हुए कांग्रेस अध्यक्षा ने तीसरी सबसे बड़ी बात कांग्रेस कार्यममिति के सदस्यों को और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आवाहन देते हुए बताया कि किस प्रकार से संसदीय प्रजातंत्र पर मौजूदा सरकार द्वारा हमला बोला जा रहा है। किस प्रकार से संसद का शीतकाल सत्र ना बुलाकर सरकार ना केवल संसदीय संस्थाओं को कमजोर कर रही है, परंतु प्रजातंत्र को भी कमजोर करने में लगी है। कारण बड़ा स्पष्ट है, क्योंकि संसद कांग्रेस अध्यक्षा के मुताबिक वो फोरम है, जहाँ पर सवाल पूछे जाएंगे। किस प्रकार से नोटबंदी को लेकर देश की अर्थव्यवस्था पर हमला हुआ, किस प्रकार से बगैर सोचे-समझे लागू की GST ने देश की अर्थव्यवस्था और छोटे-छोटे उद्योगों और उद्यमियों को कमर तोड़ ड़ाली, किस प्रकार से सरकार के भिन्न-भिन्न भ्रष्टाचार के घोटाले सामने आए हैं, किस प्रकार से सरकार के मंत्री शंकाभरी डील के अंदर संलिप्त पाए गए हैं, किस प्रकार से राष्ट्र की सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है, क्योंकि गुजरात के चुनाव के मध्यनजर प्रधानमंत्री मोदी जी इन सवालों का जवाब नहीं देना चाहते, इसलिए वो संसद के शीतकाल सत्र को बुलाने से बच रहे हैं।

परंतु कांग्रेस पार्टी जनता की अदालत के माध्यम से ये सवाल पूछती रहेगी, ये कांग्रेस अध्यक्षा ने कहा और आखिरी में एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी ने बढ़ती बेरोजगारी, व्यापक और भयंकर महंगाई जिसने गृहणियों की और आम जनमानस की कमर तोड़ डाली है, गिरते हुए निर्यात और एक ऐसी जटिल GST व्यवस्था, जो आम जनमानस के जी का जंजाल बन गई है और जिससे मुद्रा स्फीति यानि महंगाई को और ज्यादा बढ़ावा मिल रहा है। जिस प्रकार से पूरे देश में किसान आत्महत्या की दयोहड़ी पर पहुंचा है, जिस प्रकार से कृषि के उत्पाद की उचित कीमतें नहीं मिल पा रही, इन सब बातों पर उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री जी को चेताया और सरकार को चेताया कि कांग्रेस पार्टी इस प्रकार का शोषण कदापि मंजूर नहीं करेगी और अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से गुजरात के चुनाव में कड़ी मेहनत करने की अपील भी की।

कांग्रेस कार्यमिति ने इसके बाद वो शेड्यूल जो मुल्लापल्ली रामचंद्रन जी ने संगठनात्मक चुनाव का आपको पढ़कर बताया, उसको अपनी अप्रूवल दी, उसको सभी ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी और ये उम्मीद जाहिर की कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता हर प्रकार से ना केवल आने वाले चुनावों में, परंतु वो सारे मुद्दे जिनकी चर्चा कांग्रेस अध्यक्षा ने की और कांग्रेस कार्यसमिति ने उनका अनुमोदन किया, उन पर व्यापक संघर्ष कांग्रेस पार्टी करती रहेगी।

इलेक्शन का शेड्यूल इलेक्शन अथोर्टी के चेयरपर्सन ने आपको पढ़कर बताया है। पार्टी जहाँ इन मुद्दों को उठाएगी, वहाँ संगठनात्मक चुनाव का पटाक्षेप बहुत महिनों से जो आप जानना चाहते थे, वो अब हो जाएगा।

एक प्रश्न पर कि प्रस्ताव क्या पारित किया गया है और क्या शीतकालीन सत्र से लेकर राहुल गाँधी जी की ताजपोशी हो जाएगी,

सुरजेवाला ने कहा कि जैसा मैंने बताया कांग्रेस कार्यसमिति ने प्रस्ताव पारित किए। पहला प्रस्ताव था, Condolence Resolution श्री एम.एल फोतेदार के बारे में। दूसरा, कांग्रेस अध्यक्षा ने जो मुद्दे उठाए अपने Opening remarks में, कांग्रेस कार्यसमिति ने एक स्वर से उनको अनुमति देते हुए अपना अनुमोदन किया। तीसरा, कांग्रेस कार्यसमिति ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव के शेड्यूल को अपनी अप्रूवल दी और इसके साथ-साथ इस संकल्प को भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी संसद के अंदर जब शीतकाल सत्र होगा, अगर होगा और उसके बाहर इन मुद्दों, पक्षों की लड़ाई पुरजोर तरीके से लड़ेगी।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्योंकि राहुल गाँधी जी को अध्यक्ष बनाने को लेकर पहले भी एक प्रस्ताव पारित हुआ था, क्या इसी तरह का दुबारा कुछ हुआ है, श्री सुरजेवाला ने कहा कि चुनाव का जो शेड्यूल है, जो कांग्रेस कार्यमसिति द्वारा पारित किया गया और इलेक्शन अथोर्टी द्वारा अप्रूव किया गया, वो मुल्लापल्ली रामचंद्रन जी ने आपको बताया। कांग्रेस कार्यसमिति ने उस इलेक्शन शेड्यूल के, चुनाव के उस शेड्यूल की, जो प्रपोज किया था इलेक्शन अथोर्टी के द्वारा, उसको अपनी सर्वसम्मति से अनुमति दी, चुनाव की प्रक्रिया अब शुरु हो गई है, तारीखें आपके सामने हैं।

एक अन्य प्रश्न पर कि जिस तरह से सोनिया गाँधी जी गुजरात चुनाव जिताने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की है और जिस तरह से गुजरात में पाटिदार नेताओं ने हंगामा किया है, आपको लगता है कि कहीं ना कहीं मामला बिगड़ सकता है,  सुरजेवाला ने कहा कि काश जी.टेलीविजन ये भी दर्शाता कि किस प्रकार से अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा नकार दिया गया है। काश जी.टेलीविजन ये भी दिखा पाता कि किस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी के कार्यालयों में उनके कार्यकर्ताओं के द्वारा हिंसा की गई। काश जी.टेलीविजन ये भी दिखा पाता कि किस प्रकार से भाजपा के विधायकों, मंत्रियों और सीटिंग सांसदों तक ने इस्तीफा देने की धमकी, अमित शाह जी को दे ड़ाली। जिस हिंसा की आपने चर्चा की, उसका जवाब देने के लिए मैं बाध्य हूं और आप सवाल पूछने के लिए स्वतंत्र हैं। जैसा गुजरात के महासचिव प्रभारी कह चुके हैं, हिंसा का कांग्रेस पार्टी और हमारे देश की संस्कृति में कोई स्थान नहीं है। अगर किसी दल समूह या व्यक्ति को लगता है कि उनको और ज्यादा अधिकार या हिस्सेदारी मिलनी चाहिए, तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  भरत सिंह सोलंकी और गुजरात के कांग्रेस पार्टी के महासचिव प्रभारी  अशोक गहलोत जी से अवश्य आप आकर मिलें। गुजरात का चुनाव साढ़े छह करोड़ गुजरातियों और भाजपा के बीच में है। गुजरात का चुनाव 22 साल के छल और कपट को समाप्त कर विकास और प्रगति के रास्ते को दुबारा तैयार करने का है। गुजरात का चुनाव एक बार दुबारा से तरक्की के नवसर्जन के, तरक्की की गंगोत्री को आगे बढ़ाने का है, गुजरात का चुनाव राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर गुजरात जो एक कोहिनूर हीरा है इस देश का, उसको वाकई में देश और दुनिया में सिरमौर बनाने का है और कांग्रेस पार्टी इस संकल्प के प्रति कटिबद्ध है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सुरजेवाला ने कहा कि शायद आप भरत सिंह सोलंकी जी के बयान की भावना या मतलब नहीं समझ पाए।  भरत सोलंकी ने गुजरात विधानसभा का चुनाव न लड़ने का निर्णय इसलिए लिया है कि वो गुजरात के एक कोने से दूसरे कोने तक जाकर फौज के जनरल की तरह चुनाव की कमान संभाल सकें। वो निर्णय उन्होंने इसलिए लिया है कि ये चुनाव गुजरात का अस्मिता, स्वाभिमान, स्वालंबिता और विकास का चुनाव है। ये चुनाव प्रदेश की जनता व उन लोगों के बीच में है जिन्होंने 22 साल वोट विकास के नाम पर लिए परंतु राजनीति किसी और आधार पर की। इसलिए ना केवल  भरत सिंह सोलंकी परंतु पार्टी के और गुजरात और गुजरात से बाहर के नेता सब मिलकर इस लड़ाई को गुजरात के लोगों के संग लडेंगे।

एक अन्य प्रश्न पर कि जैसा कि कहा गया कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे बड़ा पार्टी की बात की गई, कांग्रेस की, क्या जो अध्यक्ष पद का चुनाव होगा उसमें सबको बढ़-चढ़ कर भाग लेने की बात कही की गई,  सुरजेवाला ने कहा कि आपने एक बड़ा प्रासंगिक सवाल पूछा है, मैंने पहले भी इसका जवाब दिया है, शायद आप उस प्रैस गोष्ठी में नहीं होंगे, मैं उसे फिर दोहराना आज वाजिब समझता हूं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस शायद एकमात्र ऐसी लोकतांत्रिक पार्टी है जो पूरे देश में भी लोकतंत्र की रक्षा करती है और जिसमें आंतरिक प्रजातंत्र भी है और ये आज से नहीं, महात्मा गाँधी जी के समय से और आजतक ये इतिहास निरंतर चलता आया है। मैं याद दिलवाऊँ कि इतिहास के पन्नों को अगर आप पलटेंगे तो आप पाएंगे कि, एक बार महात्मा गाँधी जी के उम्मीदवार के खिलाफ सुभाषचन्द्र बोस जी ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और वो जीत भी गए। परंतु ना गाँधी जी का स्नेह बोस से लिए कम हुआ, ना सुभाष चन्द्र बोस जी का आदर महात्मा गाँधी जी के लिए कम हुआ और आपने पिछले दिनों में जो एक चुनाव सोनिया जी के साथ दो व्यक्तियों ने लड़ा, जो पार्टी के बड़े आदरणीय, सम्मानित नेता हैं, हमें उन पर गर्व हैं, आज उनका स्वर्गवास हो गया, वो अलग बात है। आप वो भूल गए ये सवाल पूछते हुए कि ना केवल वो, उनको उचित स्थान और मान पार्टी ने दिया, परंतु उन दोनों के पुत्र, डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार में सोनिया के साथ केन्द्रीय मंत्री रहे। तो इस जवाब में आपके सवाल का जो प्रश्न आपने पूछा था कि उन्होंने खारिज कर दिया, मुझे लगता है कि इस प्रकार के पूर्वाग्रह से कांग्रेस पार्टी ग्रस्त नहीं। हाँ वो पार्टी, जो सत्तासिन है, ठीक है उनका इतिहास जंगे आजादी की लड़ाई का नहीं क्योंकि उनमें से कई उस समय अंग्रेज के साथ थे। परंतु उनसे ये भी ये सवाल पूछने की आवश्यकता है कि क्या आपने कभी भापजा में प्रधान पद के लिए चुनाव होते हुए और वोट ड़लते हुए सुना है? पहले दो लोग नोमिनेट किया करते थे, अब एक व्यक्ति नोमिनेट कर देता है, बाकि सब ठप्पा लगा देते हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस वो दल है जिसका एक लंबा जंगे आजादी से पहले और उससे बाद का इतिहास रहा है। यहाँ पूर्वाग्रह नहीं, यहाँ प्रजातांत्रिक तरीके से चुनाव होते हैं और अगर कई बार सर्वसम्मति होती है, सर्वसहमति हो जाती है और जब चुनाव भी हुआ, तो चुनाव के बाद ना कोई मतभेद रहा, ना मनभेद रहा। सबने फिर सोनिया गाँधी के साथ मिलकर कार्य किया।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या सोनिया गाँधी गुजरात की चुनाव रैलियों में जाएंगी, सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्षा अवश्य जाएंगे, क्यों नहीं जाएंगी। कार्यक्रम हम आपको दे देंगे।

एक अन्य प्रश्न पर कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का एक बयान सामने आया है कि कांग्रेस मुक्त भारत के लिए राहुल गाँधी का अध्यक्ष बनना जरुरी है,  सुरजेवाला ने कहा कि उनका नाम बदल देना चाहिए। उनको भटके हुए आदित्यनाथ कहना चाहिए, अब क्योंकि अब वो योगी तो रहे नहीं। वो तो राजसत्ता के रोगी बन गए हैं। राजसत्ता के रोगी को का भटक जाना सत्ता आने पर स्वभाविक है क्योंकि सत्ता हर व्यक्ति के हजम नहीं हो पाती, उनका हाजमा ठीक नहीं है। इसी वजह से आदित्यनाथ जी की नाक के नीचे उनके खुद के संसदीय क्षेत्र में 900 से अधिक बच्चे मर जाते हैं, पर उन्हें उनकी चित्कार सुनती नहीं है। उन्हें उस माँ की पीड़ा नहीं दिखती, जिसकी आँख का अकेला तारा आदित्यनाथ जी की सरकार की नालायकी, निक्कम्मेपन और नकारापन की वजह से चला गया हो। ना उनको वो जलती हुई चिताएं दिखती हैं। उन्हें अब गरीबों और दलितों से बदबू आने लगी है, इसलिए वो उन पर इत्र छिड़कवा कर और साबून लगवाकर लोगों से मिलते हैं। शासन की जिम्मेवारी निभाने की बजाए वो जुमलों के सरदार-टू बनने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश एक उत्तम प्रदेश है, उसकी जनता जुमलेबाजों को पहचान चुकी है और समय आने पर उसका सही जवाब उत्तर प्रदेश की जनता उनको देगी।

पद्मावती फिल्म पर कांग्रेस के स्टेंड पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में  सुरजेवाला ने कहा कि सबसे पहले ये प्रश्न भाजपा से पूछा जाना चाहिए। हमने तो ये फिल्म देखी नहीं पर एक बात हम पहले दिन से मानते आए हैं कि भारत की विविधताओं का सम्मान करना, भारत में जहाँ सम्पूर्ण अभिव्यक्ति की आजादी है, उसके साथ-साथ समूहों के इतिहास का सम्मान करना भी उस आजादी का हिस्सा है। अगर राजपूत समाज को पीड़ा है, तो उनसे मंत्रणा करने और उस पीड़ा को सुलटाने की जिम्मेदारी मौजूदा मोदी सरकार की है, जिन्होंने फिल्म को सेंटर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से कभी मंजूरी देते हैं, कभी वो सर्टिफिकेट वापस ले लेते हैं। दो भाषिय भाषों में बात मत करें। हाँ हिंसा का हमारे समाज में ना स्थान था, ना है और ना कभी रहेगा।