राहुल गांधी के इस करीबी नेता ने क्यों लिखा पीएम मोदी को पत्र- जानिए

राहुल गांधी के इस करीबी नेता ने क्यों लिखा पीएम मोदी को पत्र- जानिए

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राजस्थान के बाड़मेर में लगने वाली रिफाइनरी से जुड़ा है। जिसका शिलान्यास आगामी 16 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। यहां खास बात ये है ​इस रिफाइनरी का प्रदेश में दूसरी बार शिलान्यास किया जा रहा है। इसी बात को लेकर राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी और गुजरात चुनाव में मुख्य भूमिका निभाने वाले कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने पीएम नरेन्द्र मोदी को लैटर लिखा है।

इसके बाद राजस्थान में बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने आज अलवर में मीडिया से कहा कि राजस्थान में रिफाइनरी को लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने यूपीए सरकार में भी कांग्रेस को चेताया था और कहा था कि राजस्थान के लिए विन विन सिचुएशन नहीं है। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि जो काम कांग्रेस सरकार 56 हजार करोड़ देकर कर रही थी, भाजपा ने वही काम 16 हजार करोड़ में किया है। इस तरह सीधे तौर पर प्रदेश के 40 हजार करोड़ रुपए बचे हैं।

परनामी ने कहा ​है कि यदि ऐसा नहीं होता तो और इस रकम पर ब्याज लगाया जाए तो 1 लाख 57 हजार करोड़ रुपए का भार अशोक गहलोत राजस्थान की जनता पर डाल देते। इसमें प्रदेश की जनता का हित नहीं बल्कि ​अहित था।

उपचुनाव को लेकर परनामी ने कहा कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है। अब जनता तुष्टीकरण की राजनीति नहीं बल्कि सबका साथ सबका विकास चाहती है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत ने रिफाइनरी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए दोबारा शिलान्यास पर आपत्ति जताई है। गहलोत ने पत्रकारों से कहा कि जब तत्कालीन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट का शिलान्यास हो चुका है तो फिर दोबारा इसे कराने की क्या जरूरत है।

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने रिफाइनरी को लेकर लोन देने वाली कंपनी से ब्याज मुक्त ऋण का प्रावधान किया था और लोन भी तेल उत्पादन के हिसाब से ही मिलना तय हुआ था। उन्होनें कहा कि मैंने रिफाइनरी को दोबारा शिलान्यास कराए जाने को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र तक ​लिखा है।

उन्होंने कहा कि रिफाइनरी का दोबारा शिलान्यास कराकर भाजपा सरकार सारा श्रेय खुद ही ले लेना चाहती है। जबकि रिफाइनरी को लेकर पूरी डील केंद्र में यूपीए और राजस्थान में कांग्रेस सरकार के रहते हुए की गई थी।