रॉबर्ट वाड्रा की जांच कर रहे जस्टिस ढींगरा को मोदी सरकार से मिला अनुचित फायदा

रॉबर्ट वाड्रा की जांच कर रहे जस्टिस ढींगरा को मोदी सरकार से मिला अनुचित फायदा

Posted by

नई दिल्ली।  रणदीप सिंह सुरजेवाला, मीडिया प्रभारी, अखिल भारतीय काँग्रेस कमेटी ने आज प्रेसवार्ता में निम्नलिखित बयान जारी किया-

भाजपा सरकार द्वारा जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा आयोग व 31 अगस्त, 2016 को इसके द्वारा सौंपी हुई रिपोर्ट का इस्तेमाल बदनीयत व चरित्र हनन के लिए एक राजनैतिक साजिश के तौर पर किया गया है। शुरु से ही इस आयोग का इस्तेमाल बदले की भावना व पूर्वाग्रह पर आधारित है। ढींगड़ा आयोग के गठन से लेकर, आयोग की कार्यवाही से लेकर, आयोग द्वारा पक्षपातपूर्ण तरीके से व कमीशन आॅफ इंक्वायरी कानून की धारा 8 (बी) व 8 (सी) के अनुरूप दोषी करार दिए जाने वाले व्यक्ति को बगैर मौका दिए कानूनी सिद्धांतों व तथ्यों के विरुद्ध मनमानी रिपोर्ट देने तक पूर्वाग्रह की समस्त कहानी जगजाहिर है।

इस पूरे भाजपाई षडयंत्र के मकड़जाल के चलते, कांग्रेस पार्टी ने पहले ही चेताया था कि जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा अपने न्यायिक आचरण में पक्षपात व दोषपूर्ण रवैये के चलते इस आयोग के अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी निभाने के अयोग्य हैं।

अब सार्वजनिक पटल पर उपलब्ध साक्ष्यों व अदालत के आदेशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जस्टिस एन. एन. ढींगड़ा आयोग के प्रमुख के तौर पर कार्य करने के संपूर्ण तौर से अक्षम व असमर्थ थे। ढींगड़ा आयोग की रिपोर्ट को इसी आधार पर सिरे से खारिज किया जाना अनिवार्य है। कुछ तथ्य जानना आवश्यक है:-

1.जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा द्वारा हरियाणा सरकार से गोपाल सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट हेतु (जिसके वो स्वयं अध्यक्ष हैं) सुविधाएं लेने व यकायक एक निजी व्यक्ति द्वारा गुड़गांव में बेशकीमती जमीन उपहारस्वरूप लेने के उपरांत एक स्वतंत्र और निष्पक्ष आयोग के तौर पर उनकी भूमिका संदेह के घेरे में चली जाती है। दो तथ्य जानना आवश्यक है:-
नीतिबाग, नई दिल्ली स्थित, गोपालसिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख जस्टिस ढींगड़ा हैं। यह तथ्य किसी से छिपा नहीं कि ढींगड़ा आयोग के गठन के बाद गुड़गांव के एक निजी व्यक्ति ने करोड़ों रु. की 2235 वर्गगज जमीन ट्रस्ट को उपहार में दी। क्या कारण है कि पूरे देश और गुड़गांव की हजारों चैरिटेबल ट्रस्ट को छोड़कर गुड़गांव के इस व्यक्ति द्वारा नीतिबाग, नई दिल्ली स्थित ढींगड़ा जी की अध्यक्षता वाली ट्रस्ट को ही जमीन उपहार में दी? और वो भी तक जब ढींगड़ा आयोग गुड़गांव में ही जमीन की लाईसेंसिंग की जांच कर रहा था।

बात यहीं खत्म नहीं हुई। उपहार में जमीन लेने के बाद 08 दिसंबर, 2015 को जस्टिस ढींगड़ा ने हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर ट्रस्ट की जमीन तक पक्की सड़क बनाने की मांग कर डाली। हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार ने भी उसी दिन यानि 8 दिसंबर को बिना कोई पल गंवाए 96 लाख रु. इस सड़क के लिए मंजूर कर दिए। इसके विपरीत गुड़गांव के ग्रामीण वर्षों से अपने गांव/खेत की सड़कें बनाने के लिए मांग रख रहे हैं। क्या इस विशेष उपकार का कारण कोई बता पाएगा?

2. ढींगड़ा आयोग के कार्यकाल के दौरान, जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा को 6 अप्रैल, 2016 को एक निजी कंपनी, द प्रिंटर हाउस प्राईवेट लिमिटेड का ‘निरीक्षक’ ¼Observor½

नियुक्त किया गया। इस बारे निम्नलिखित तथ्य जानना अनिवार्य है:-
1.जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा इस दौरान दो तनख्वाहं/Honorarium लेते रहे – एक ढींगड़ा आयोग के अध्यक्ष के तौर पर व दूसरी द प्रिंटर हाउस प्राईवेट लिमिटेड के निरीक्षक के तौर पर। क्या दूसरी नियुक्ति लेने व तनख्वाह/ Honorarium लेने से पहले जस्टिस ढींगड़ा ने हरियाणा सरकार से कोई अनुमति ली?

2.द प्रिंटर हाउस प्राईवेट लिमिटेड के निरीक्षक के तौर पर काम करते हुए जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा ने ₹8,88,000 व ₹6,66,000 की राशि कंपनी के खाते से एक और कंपनी सिनेमन ट्रेल्स एलएलपी. को दे दी, जिसकी मालिक उनकी खुद की बेटी मिस भारती ढींगड़ा हैं। क्या यह वित्तीय कुप्रबंधन व ‘Conflict Of Interest’ नहीं है?

3.द प्रिंटर हाउस प्राईवेट लिमिटेड के निरीक्षक के तौर पर काम करते हुए जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा द्वारा कंपनी के खाते से स्वयं व धर्मपत्नी के लिए अंतर्राष्ट्रीय व देश की हवाई यात्रा व होटल का खर्चा ले लिया गया। इसके बाद श्री ढींगड़ा स्वयं अपनी पत्नी व बेटी के लिए श्रीलंका की अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा का खर्चा कंपनी के खाते से लेने के लिए कंपनी के वाईस प्रेसिडेंट जगदीप सिंह को कहा गया। उसके द्वारा एतराज उठाए जाने पर, श्री ढींगड़ा ने 17 जुलाई, 2017 को श्री जगदीप सिंह की नौकरी बर्खास्त कर दी। आदेश की प्रतिलिपि संलग्नक ।1 संलग्न है।

4.इस पूरे मामले का संज्ञान दिल्ली हाईकोर्ट की दो जजों की खंडपीठ द्वारा लिया गया। माननीय न्यायाधीशों ने ‘निरीक्षक’ यानि जस्टिस ढींगड़ा के आचरण बारे रोष ¼displeasure½ व्यक्त किया व कंपनी के खातों में किसी प्रकार का खर्चा डालने पर रोक लगाई व जस्टिस ढींगड़ा पर यह रोक भी लगाई कि वो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कंपनी के पैसे का निवेश कहीं भी नहीं कर पाएंगे। श्री जगदीप सिंह की नौकरी बर्खास्त करने बारे दो जजों की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट की एकल जज खंडपीठ को निर्देश जारी किया कि वो पूरे मामले की जांच कर उचित आदेश पारित करें। दो जजीय बेंच के 9 अगस्त, 2017 के आदेश की प्रतिलिपि संलग्नक ।2 संलग्न है।

5.इसके बाद यह सारा मामला दिल्ली हाईकोर्ट के एकल जज के द्वारा सुना गया। सब तथ्यों का अध्ययन कर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जगदीप सिंह को बर्खास्त करने वाले जस्टिस एस.एन. ढींगड़ा के आदेश पर रोक लगा दी। इसके साथ साथ दो जजीय खंडपीठ के आदेशों का संज्ञान लेते हुए कंपनी के खातों से पैसा निकालने व निवेश पर प्रतिबंध का आदेश बरकरार रखा गया। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 25 अगस्त, 2017 की प्रतिलिपी संलग्नक ।3 संलग्न है।

Ceaser’s wife must be above suspicion.हम जस्टिस एस. एन. ढींगड़ा का सम्मान करते हैं। परंतु उनके आचरण, पक्षपात तथा दोषपूर्ण रवैये के चलते उनकी स्वायत्ता, स्वतंत्रता व निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। इसके चलते 31 अगस्त, 2016 की ढींगड़ा आयोग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करना अनिवार्य है। हम मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री, श्री मनोहर लाल खट्टर अपना राजधर्म निभाएं, सार्वजनिक तौर से माफी मांगें व व्यक्ति विशेष को राजनैतिक तौर से बदनाम करने की साजिश करना बंद करें।