सास-बहू की लड़ाई लड़ रहे योगी के विधायक और मंत्री

सास-बहू की लड़ाई लड़ रहे योगी के विधायक और मंत्री

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लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. मसूद अहमद ने उ.प्र. की योगी सरकार के खोखले नारों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये कहा है कि इस सरकार से उ.प्र. के विकास की कामना करना बेइमानी है। क्योंकि सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली सरकार अपने ही 325 लोगों के कुनबे को नहीं संभाल पा रही है।

सास-बहू की लड़ाई लड़ रहे विधायक और मंत्री।
विधायक और मंत्री आपस में सास बहू की लड़ाई लड़ रहे हैं ऐसे में विकास की बात सोचना गूलर के फूल की तरह होगा।ताजमहल जैसी विश्व प्रसिद्व इमारत के सन्दर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री और विधायक संगीत सोम में ही तालमेल नहीं है।योगी आदित्यनाथ केवल ताजमहल ही नहीं शाहजहां और मुमताज महल की कब्र पर भी जाते है।

ताजमहल की तारीफ करते हुये करोड़ों रूपये की योजनाओं की घोषणा करते हैं। परन्तु विधायक वहां शंकर जी की मूर्ति स्थापित करने की कल्पना करते हैं। इस प्रकार फिर से ताजमहल को मुददा बनाकर साम्प्रदायिकता की हवा फैलाने का प्रयास किया जा रहा है जो सर्वथा निंदनीय है।

कब तक जनता को बनाया जायेगा बलि का बकरा ?
डाॅ. अहमद ने कहा कि लगभग 3 माह पहले भारतीय समाजपार्टी के मंत्री ने अपना आक्रोश जताकर सरकार कोचेतावनी दी थी। विगत सप्ताह से विधायक मयंकेश्वर सिंह ने एक मंत्री के खिलाफ बिगुल बजा रखा है। अब राजधानीलखनऊ के पश्चिम विधान सभा क्षेत्र के विधायक सुरेश कुमार श्रीवास्तव कह रहे हैं कि अफसर केवल मंत्रियों के क्षेत्र में कार्य करा रहे हैं उनकी कोई नहीं सुन रहा है।

आखिर इस प्रकार का वातावरण पैदा करके विकास कार्यो से मुंह मोड़ने की साजिश कब तक होती रहेगी। यदि विधायक की उचित सिफारिश को अधिकारी नहीं मानते हैं तो उसे और स्वयं सरकार को अपनी कमियों के बारे में सोचना होगा। केवल जनता को बलि का बकरा कब तक बनाया जायेगा।

खुद को ठगा महसूस कर रहा किसान
रालोद प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. मसूद अहमद ने कहा कि प्रदेश की जनता ने विकास के लिए भाजपा को चुना है। परन्तु विकास के स्थान प्रदेश के सामाजिक विनाश की ओर इस सरकार के प्रतिनिधियों का अधिक ध्यान देना हास्यापद लगता है।

जनता मंहगाई की मार झेल रही है क्षेत्रीय विकास नगण्य है। किसान स्वयं को ठगा महसूस कर रहा है। मजदूर अपनी रोजी रोटी की तलाश में दिन रात भटक रहा है। विधायक तथा मंत्री अलग-अलग राग अलापकर जनता का ध्यान असली मुददों से भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।